मेरा नाम कोमल है और मैं २५ साल की हूँ। मैं एक गाँव में रहने वाली लड़की हूँ और हमारे घर की माली हालत ठीक नहीं थी। खुद के बारे में कहूँ तो मैं एकदम भला की खूबसूरत हूँ—गोरा बदन, बड़े-बड़े स्तन, गुलाबी आँखें और मेरा जिस्म एकदम मखमली है।
इतनी हसीन हूँ कि मेरे गाँव के लोग मुझे गाँव की ऐश्वर्या राय भी बुलाते हैं। हालाँकि मैं पढ़ाई में इतनी अच्छी नहीं थी और मेरे माता-पिता बहुत बूढ़े हो चुके थे, तो उन्हें डर था कि उनकी जवान बेटी का कोई गलत फायदा न उठा ले, इसलिए वे जल्दी से जल्दी मेरी शादी करवाना चाहते थे।
हमारे गाँव में एक बड़े सेठ जी रहते हैं जिनका नाम है बंसी लाल। उनके दो बेटे थे—बड़ा बेटा रमेश और छोटा महेश। बड़े की तो शादी लगभग दो साल पहले हो चुकी थी और छोटे की अभी होनी थी।
सेठ जी का बेटा इंग्लैंड से लॉ की पढ़ाई कर रहा था और अक्सर कुछ महीनों के लिए छुट्टियों पर घर आया करता था।
एक दिन सेठ जी हमारे घर आए अपने छोटे बेटे के साथ और उन्होंने मेरे माता-पिता से मिलकर मेरा रिश्ता अपने छोटे बेटे महेश के साथ शादी पक्की कर दी। साथ ही उन्होंने कहा कि वे कोई दहेज नहीं लेंगे, बल्कि मेरे माता-पिता का जिंदगी भर का दवाई और इलाज का खर्चा पूरा करेंगे।
मैं बहुत खुश हो गई, मगर मुझे क्या पता था कि मेरी शादी नहीं, बल्कि एक सौदा हुआ है।जिस दिन मेरी शादी हुई और विदाई हुई, उसी दिन महेश वापस इंग्लैंड चला गया और मुझे तो अपनी सुहागरात मनाने का मौका तक नहीं मिला।
मेरी सुहागरात के दिन मैं दुल्हन के जोड़े में बिस्तर पर अकेली लेटी हुई मचल रही थी और सोच रही थी कि अब कौन मेरी प्यास बुझाएगा। उसी वक्त मुझे पास वाले कमरे से, जो कि ससुर जी का था, तेज-तेज सिसकियों की आवाजें आने लगीं—
“आआआह्ह्ह छोड़िए ना बाबूजी आआह्ह आहाआ…”
जैसे ही मैंने कमरे के अंदर देखा तो ससुर जी मेरी जेठानी, यानी रमेश की पत्नी के साथ बिस्तर पर मजे कर रहे थे। सेठ जी एकदम नंगे थे और मेरी जेठानी जिसका नाम रीमा है, वह उनके मोटे लंबे लंड को बड़े प्यार से अपने हाथ से मसल रही थी।
मैं यह दृश्य देखकर हैरान रह गई, लेकिन मेरे अंदर भी मचलता शुरू हो गया। सर में गर्मी छा गई। फिर मैं उन्हें देखते हुए दरवाजे के पास खड़ी होकर अपने बड़े स्तनों को एक हाथ से दबाने लगी और दूसरा हाथ नीचे अपने घाघरे में डालकर जोर-जोर से अपनी गीली चूत को रगड़ने लगी और सिसकियाँ भरने लगी—
“आआह्ह आआह्ह्ह्ह…”
अचानक रीमा और ससुर जी ने मेरी सिसकियाँ सुन ली और मुझे बिस्तर पर आने का निमंत्रण दिया।
ससुर जी बोले—“आओ बहुरानी, तुम्हारा ही इंतजार था। महेश तो बस नाम का पति है, तुम्हारा असली मालिक और पति आज से मैं ही हूँ। ”रीमा भाभी बोली—“आओ मेरी प्यारी देवरानी, एक साथ मिलकर इस सख्त लंबे लंड का मजा लें।”फिर क्या था, मैं भी अंदर चली गई और बिस्तर पर उन दोनों के साथ लेट गई।
ससुर जी ने मेरा घाघरा ऊपर उठाया और मेरी पहले से ही भीगी चूत पर मुँह लगा दिया। उनकी मोटी जीभ मेरी चूत की फाँकों में घुसकर चाटने लगी। “आआह्ह बाबूजी… और जोर से चूसो मेरी चूत…” मैं कराह उठी।
रीमा ने मेरे स्तनों को बाहर निकाला और एक स्तन अपने मुँह में ले लिया, चूसने और काटने लगी, जबकि दूसरा स्तन ससुर जी के हाथ में था। ससुर जी का लंड इतना मोटा और लंबा था कि रीमा उसे दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर-नीचे कर रही थी और कभी-कभी मुँह में ले लेती थी।
मैं पागल हो गई। ससुर जी ने मुझे घोड़ी बनाकर घुटनों के बल बैठाया और पीछे से अपना मोटा लंड मेरी तंग चूत में धकेल दिया। “आआआह्ह्ह… बाबूजी… मेरी चूत फट जाएगी… कितना मोटा है आपका लंड!” मैं चीखी, लेकिन दर्द के साथ मजा भी आने लगा।
रीमा मेरे मुँह के नीचे आ गई और मैंने अपनी जीभ से उसकी गीली चूत चाटना शुरू कर दिया। तीनों के शरीर एक-दूसरे से चिपक गए। ससुर जी जोर-जोर से धक्के मार रहे थे, उनका लंड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ उनकी झांट मेरी गांड से टकरा रही थी।
“लो बहुरानी… आज से रोज यही होगा… महेश को भूल जाओ… तुम मेरी रखैल हो अब!” ससुर जी गरजे और और तेज धक्के मारने लगे।
मैं चिल्लाने लगी—“हाँ बाबूजी… मारो… और जोर से चोदो मेरी चूत… आआह्ह… मैं आपकी हूँ… आपका लंड मेरी चूत में हमेशा रहे!”रीमा भी नीचे से सिसक रही थी। ससुर जी ने अचानक अपना लंड निकाला और मुझे उल्टा लिटाकर दोनों टाँगें कंधों पर चढ़ा लीं। फिर पूरा लंड एक झटके में अंदर घुसा दिया और गहरी चोदने लगे। उनकी मोटी गांड ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने रीमा के स्तनों को मसलते हुए अपना मुँह खोल दिया और ससुर जी का थूक भरा मुँह मेरे मुँह से चिपक गया।
जल्दी ही तीनों चरमसुख के करीब पहुँच गए। ससुर जी ने आखिरी जोरदार धक्के मारे और अपना गर्म गाढ़ा वीर्य मेरी चूत के अंदर उड़ेल दिया। “आआआह्ह्ह… ले… मेरा पूरा माल अपनी चूत में!”
उनका वीर्य मेरी चूत से बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा। मैं भी झड़ गई, मेरी चूत सिकुड़-सिकुड़कर उनके लंड को निचोड़ रही थी। रीमा भी मेरे मुँह पर बैठकर झड़ गई और अपना रस मेरे चेहरे पर बहा दी।
हम तीनों पसीने से लथपथ, साँसें उखाड़ते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। ससुर जी का आधा खड़ा लंड अभी भी मेरी चूत में था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“अब रोज रात यही होगा बहुरानी… तुम्हारी प्यास मैं ही बुझाऊँगा।”मैंने मुस्कुराते हुए उनके लंड को और अंदर खींच लिया और कहा—“हाँ बाबूजी… आज से आप ही मेरे असली पति हो… रोज अपनी मोटी लंड से मेरी चूत फाड़ना… मैं हमेशा तैयार रहूँगी।”
रात भर ससुर जी ने मुझे और रीमा को बारी-बारी से चोदा, कभी मेरी गांड में, कभी रीमा की चूत में, कभी दोनों को एक साथ चाटते हुए। सुबह होते-होते मेरी चूत और गांड दोनों उनके वीर्य से भरी हुई थीं और मैं पूरी तरह संतुष्ट, मस्त और प्यार से भरी हुई थी।अब मुझे पता चल गया था—मेरी असली सुहागरात तो आज ही हुई थी… और यह हर रात दोहराई जाएगी।
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