मेरा नाम काजल है। मैं तुम्हें वो बात बता रही हूँ जो कई महीने पहले हुई थी। उस दिन के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। मैं उस समय 20 साल की थी—गोरे चिकने बदन वाली, 32-26-34 की फिगर। उस शाम काला लेदर ब्रा और मैचिंग मिनी स्कर्ट पहने बैठी थी। मेरी सहेली दिशा 19 साल की थी—नेवी ब्लू क्रॉप टॉप और लाइट ब्लू डेनिम शॉर्ट्स में, 34-28-36 का गदराया गोरा जिस्म। हम दोनों एक छोटे से फ्लैट में रहती थीं और किराया दो महीने से बकाया पड़ा था।
मकान मालकिन निशा मैडम… 35 साल की हसीन औरत। लाल पत्ते वाले प्रिंट की साड़ी में हमेशा नजर आती थीं। 36-28-36 का मस्त गोरा बदन, भारी स्तन और गोल-गोल नितंब। उनकी आँखों में हमेशा एक अजीब सी हवस चमकती रहती थी।
उस दिन शाम को दरवाज़ा खटखटाया गया। निशा मैडम अंदर घुसीं। साड़ी का पल्लू उनके भारी स्तनों पर टिका था। उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और मुस्कुराईं—“काजल… दिशा… किराया दो महीने से बाकी है। पैसे हैं?
”हम दोनों चुप रहे। पैसे कहाँ थे?
निशा मैडम ने साड़ी का पल्लू गिरा दिया। लाल ब्लाउज में उनके 36 साइज के बड़े-बड़े स्तन उछल रहे थे। उन्होंने ब्लाउज के हुक खोले और स्तन बाहर निकाल लिए। गुलाबी कड़े निपल हवा में ठिठक गए।
“पैसे नहीं हैं तो आज मुझे एक लेस्बियन शो दो। दोनों एक-दूसरे के साथ सेक्स करो, मैं बिस्तर पर बैठकर देखूँगी। आज से तुम दोनों मेरी रंडियाँ बनोगी।”
मैंने तुरंत पीछे हटी। “नहीं मैडम… ये गलत है… हम ऐसी नहीं हैं… प्लीज छोड़ दीजिए…”
दिशा भी घबराकर बोली, “मैडम… हम लड़कियाँ हैं… ये नहीं हो सकता… किराया जल्दी दे देंगे… हमें मजबूर मत कीजिए…”
निशा मैडम की आँखें तिरछी हो गईं। “मजबूर तो मैं कर ही रही हूँ। कपड़े उतारो। अभी।
”हम दोनों काँप रहे थे, लेकिन उनकी आवाज़ में इतना रौब था कि इनकार करना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने खुद आकर मेरे लेदर ब्रा को खोल दिया और दिशा का क्रॉप टॉप ऊपर धकेल दिया। हम नंगे हो गए—मैं मिनी स्कर्ट और पैंटी के बिना, दिशा शॉर्ट्स और पैंटी के बिना। निशा मैडम साड़ी उतारकर सिर्फ पेटीकोट में बिस्तर के किनारे बैठ गईं, अपने भारी स्तन सहलाते हुए।
“अब एक-दूसरे को चूमो। मैं सिखाऊँगी।”
मैंने दिशा की तरफ देखा। दोनों की आँखों में डर था। निशा मैडम बोलीं, “काजल, दिशा के होंठों पर मुँह रखो।” मैंने हिचकिचाते हुए दिशा के करीब जाकर उसके होंठों को छुआ। दिशा ने भी हल्के से होंठ दबाए, लेकिन शरीर अकड़ा हुआ था।
“जीभ अंदर डालो… ऐसे…” निशा मैडम ने हमें सिखाया। मैंने जीभ दिशा के मुँह में डाली। पहले तो सिर्फ मजबूरी थी, लेकिन धीरे-धीरे दिशा की जीभ भी मेरे मुँह में घूमने लगी। किस गहरी होती गई।
“अब स्तन चूसो।” निशा मैडम ने आदेश दिया। मैंने दिशा के 34 साइज के मुलायम स्तन को मुँह में लिया और निपल चूसने लगी। दिशा ने आँखें बंद कर लीं, “आह्ह… काजल… मत…” लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध कमजोर पड़ रहा था। उसने भी मेरे छोटे सख्त स्तन चूस लिए।
फिर निशा मैडम बोलीं, “अब नीचे जाओ। एक-दूसरे की चूत चाटो। मैं बताऊँगी कैसे।
”हम दोनों बिस्तर पर लेट गए, 69 की पोजीशन में। मैंने दिशा की टाँगें फैलाईं। उसकी गुलाबी गीली चूत मेरे चेहरे के सामने थी। मैंने हिचकिचाते हुए जीभ फेरी। “ऐसे चाटो… क्लिट को चूसो… जीभ अंदर डालो…” निशा मैडम सिखा रही थीं, अपनी उंगलियों से अपनी चूत सहलाते हुए देख रही थीं।
दिशा ने भी मेरी चूत पर जीभ फेर दी। पहले तो हम दोनों सिर्फ मजबूरी में कर रहे थे, कराहें दबी हुई थीं—“नहीं… ये गलत है… रुक जा…” लेकिन जैसे-जैसे जीभें गहरी होती गईं, चूतें गीली होती गईं, विरोध गायब होने लगा। मेरी कमर अपने आप दिशा की जीभ पर उठने लगी। दिशा भी जोर-जोर से मेरी चूत चाटने लगी।
“आह्ह… काजल… और अंदर… मजा आने लगा…” दिशा कराह उठी।
मैं भी बड़बड़ाई, “दिशा… तेरी चूत कितनी मीठी है… चाट… और चाट…”
निशा मैडम बिस्तर पर बैठी हमारी हर हरकत देख रही थीं, अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में घुसाए। “शाबाश… अब मजा ले रही हो दोनों। और जोर से चाटो।”ह
म दोनों अब पूरी तरह डूब चुके थे। एक-दूसरे की चूत चाट रहे थे, निपल काट रहे थे, गांड मसल रहे थे। पसीना और लसीला पानी बिस्तर पर फैल रहा था। तभी निशा मैडम उठकर हमारे बीच आ गईं।
“अब मुझे भी शामिल करो। दोनों मिलकर मेरी सेवा करो।”
शो खत्म हो चुका था। अब ये पैशनेट थ्रीसम बन गया था। मैंने निशा मैडम के एक बड़े भारी स्तन को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसा। दिशा ने दूसरा स्तन चूस लिया। फिर हम दोनों नीचे सरक गए। मैंने उनकी बालों वाली गीली चूत पर जीभ लगा दी, क्लिट चूसा, उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। दिशा ने उनकी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया।
“आह्ह… मेरी रंडियों… दोनों मिलकर चाटो… जोर से… मेरी चूत चूसो…” निशा मैडम कराह रही थीं, कमर उठा-उठाकर हमारी जीभों पर रगड़ रही थीं।
हम तीनों उलझ गए। निशा मैडम की उंगलियाँ मेरी चूत में और दिशा की चूत में घुस रही थीं। हम दोनों बारी-बारी से उनकी चूत और गांड चाट रहे थे, एक-दूसरे के स्तन चूस रहे थे। कराहें, पसीना, पानी—सब मिलकर कमरे को हवस से भर दिया था।
“आ रही हूँ… दोनों की जीभ से आ रही हूँ…” निशा मैडम जोर से कांप उठीं। उनकी चूत से पानी हमारी जीभों पर छूटने लगा। हमने हर बूंद चाट ली। फिर मैं और दिशा भी एक साथ झड़ गईं, एक-दूसरे की चूत पर पानी छोड़ते हुए।
बाद में तीनों नंगी लेटी रहीं। निशा मैडम ने हमारी गांड थपथपाई, साँसें स्थिर करते हुए बोलीं—“आज से हर महीने किराया ऐसे ही वसूला जाएगा। पहले तुम दोनों मेरा लेस्बियन शो करोगी, फिर तीनों मिलकर मजे लेंगे। समझीं?”
मैं और दिशा, थकी हुई लेकिन अंदर तक संतुष्ट, मुस्कुराई थीं। विरोध अब सिर्फ याद रह गया था।
“जी मैडम… अब से हर महीने आपके लिए शो करेंगे… आपकी चूत चाटेंगे… दोनों मिलकर आपको खुश रखेंगे… किराया चुका देंगे।”
निशा मैडम ने हमें गले लगाया, हमारे स्तन मसलते हुए।
“अच्छी लड़कियाँ। अब सो जाओ… रात को फिर से शुरू करेंगे।”
बिस्तर पर तीनों गोरे, पसीने से तर शरीर एक-दूसरे से चिपके रहे थे। किराया अब सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि चूत, गांड और जीभ से वसूला जाने वाला था।
और तब से… हर महीने यही होता है। वही दिन हमारी जिंदगी का नया नियम बन गया।
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