मेरा नाम निशा है। उम्र 32 साल। मैं एक स्कूल टीचर हूँ, लेकिन घर की माली हालत इतनी खराब है कि मुझे अमीर घरों के बच्चों को प्राइवेट ट्यूशन भी पढ़ानी पड़ती है। मेरा एक स्टूडेंट है – बिट्टू। मैथ्स में इतना कमजोर कि उसके मम्मी-पापा ने मुझे अच्छे पैसे देकर रख लिया।
एक दिन मैं बिट्टू के घर ट्यूशन देने पहुँची। उस दिन मैंने साड़ी पहनी थी – एकदम काली, पारदर्शी वाली, जो बॉडी पर चिपकी हुई थी। ब्लाउज इतना टाइट कि मेरी चुचियाँ बाहर आने को बेताब थीं। गहरा नेकलाइन, आधा से ज्यादा क्लीवेज दिख रहा था। नीचे पेटीकोट भी कमर से नीचे सरक रहा था, जिससे मेरी नाभि और पेट की चिकनी त्वचा साफ नजर आ रही थी। मैं आईने में खुद को देखकर ही गर्म हो गई थी – आज तो मैं पूरी आग लगाने वाली लग रही थी।
बिट्टू के मम्मी-पापा किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे। घर में सिर्फ हम दोनों। जब मैं बिट्टू को ट्यूशन दे रही थी, तभी अचानक मेरा पेन नीचे गिर गया। मैं उसे उठाने के लिए झुकी, और जैसे ही झुकी, मेरी साड़ी का पल्लू सरककर पूरी तरह नीचे गिर गया। मेरे मोटे-मोटे, भरे-भरे स्तन ब्लाउज से बाहर झाँकने लगे – काले लेस वाली ब्रा में दबी हुई वो गोल-गोल चुचियाँ इतनी उभरी हुई थीं कि बिट्टू की आँखें फटी की फटी रह गईं।
उसकी नजरें मेरे स्तनों पर टिक गईं – गंदी, भूखी नजरों से घूरने लगा। उसकी साँसें तेज हो गईं, और अचानक उसने मेरे दोनों स्तनों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया, और जोर-जोर से मसलने लगा, जैसे सालों से इंतजार कर रहा हो।
उसकी उँगलियाँ मेरी नरम त्वचा में धँस रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए थे। मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई – एक मीठी सिहरन, गर्मी नीचे तक उतर गई। चूत में आग लग गई, गीली होकर तड़पने लगी। लेकिन बाहर से मैं गुस्से से लाल हो गई। मैं चिल्लाई, “नालायक! बदतमीज! ये क्या कर रहा है? शर्म नहीं आती क्या, बेशर्म कहीं का!”
मगर बिट्टू उस वक्त पूरी तरह अपना आपा खो चुका था। उसकी आँखें लाल थीं, लंड पैंट में फड़फड़ा रहा था। मेरे गुस्से की परवाह किए बिना उसने फिर से मेरी चुचियों को दबाना शुरू कर दिया। इस बार और जोर से। फिर झुककर अपना मुँह मेरे स्तनों पर रख दिया। गरम साँसें मेरी त्वचा पर लग रही थीं। उसने ब्रा ऊपर सरकाई और मेरे निप्पल को मुँह में ले लिया। जोर-जोर से चूसने लगा, जीभ से चाटने लगा, दाँतों से हल्का काटने लगा। “आह्ह्ह… बिट्टू… छोड़… मत कर…” मैं कराह रही थी, लेकिन मेरी आवाज में अब गुस्सा नहीं, बस कामुकता थी।
मेरे हाथ अनजाने में उसके सिर पर चले गए, उसे और दबाने लगे। वो और पागल हो गया। एक हाथ से मेरी चुचियाँ मसलता रहा, दूसरे हाथ से मेरी साड़ी ऊपर सरकाने लगा। उसकी उँगलियाँ मेरी जाँघों पर फिसल रही थीं, पैंटी तक पहुँच गईं। मैंने हल्का सा विरोध किया, लेकिन वो रुकने वाला नहीं था। पैंटी साइड में सरकाई और सीधे मेरी गीली चूत पर उँगली फेरने लगा। “मैम… आप कितनी गीली हो… मेरे लिए ही तो…” वो फुसफुसाया, और फिर मेरी चूत में एक उँगली अंदर डाल दी। मैं चीख पड़ी – “आआह्ह्ह… हाँ… और अंदर…” अब मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी।
मैंने उसकी शर्ट उतारी, उसकी पैंट की चेन खोली और उसका सख्त, गरम लंड बाहर निकाला। वो इतना मोटा और लंबा था कि मेरी आँखें चमक उठीं। मैंने उसे मुट्ठी में भरा और सहलाने लगी।
फिर मैं बिस्तर पर लेट गई, साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकाया। दिल की धड़कनें तेज़ हो रही थीं। मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “आजा बिट्टू… पास आ… मुझे तेरी ज़रूरत है।” वो धीरे-धीरे मेरे ऊपर आ गया। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। फिर एक गहरा, लंबा किस… जैसे समय थम गया हो। फिर उसने एक झटके में पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। मैं चीख उठी – दर्द और मजा दोनों। वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के में मेरी चुचियाँ उछल रही थीं। मैंने अपनी टाँगें उसके कमर पर लपेट लीं, उसे और गहराई तक खींच रही थी। “मैम… आपकी चूत कितनी टाइट है… आह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…” वो कराह रहा था।
आखिरकार हम दोनों एक साथ झड़ गए। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “अब से हर ट्यूशन में मैथ्स के साथ ये भी… समझ गया ना?” बिट्टू ने मुस्कुराकर मेरी चुचियों पर फिर से हाथ फेरा। “हाँ मैम… रोज… रोज ऐसा ही होगा।” और उस दिन से मेरी ट्यूशन क्लासेस सिर्फ मैथ्स की नहीं रह गईं… वो अब मेरी चुदाई की क्लासेस बन गई थीं। हर बार नया स्टाइल, नया मजा। बिट्टू अब मैथ्स में भी टॉप करने लगा था – शायद इसलिए कि उसकी मैम उसे “एक्स्ट्रा क्रेडिट” दे रही थी।
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