मेरा नाम रिया है और मैं 19 साल की हूं। अहमदाबाद में रहती हूं। आज से लगभग एक साल पहले मैं एक कॉलेज जाने वाली सीधी-सादी लड़की थी, लेकिन चंद महीनों पहले कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
कॉलेज में मुझे श्याम नाम के एक लड़के से प्यार हो गया था, लेकिन वह हमारी बिरादरी का नहीं था। इसीलिए मम्मी-पापा ने मुझसे सात साल बड़े, रईस बाप की बिगड़ी औलाद मुकेश से शादी कर दी। मेरे ससुर यानी मुकेश के पिता ललित एक बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं। सच कहूं तो शुरू में वे मुझे बहुत अच्छे इंसान लगे थे। उनकी पत्नी की शादी के कुछ साल बाद ही मौत हो गई थी, इसलिए वे अकेले ही रहते थे।
शादी की पहली रात से ही मुकेश ने मुझे इग्नोर करना शुरू कर दिया। वह हर वक्त मोबाइल पर अपने दोस्तों के साथ व्यस्त रहता। मैं हर रात बिस्तर पर तड़पती रहती, क्योंकि अब मेरी जिंदगी में कोई नहीं था जो मेरी प्यास बुझाए। लगा कि मेरी जवानी ऐसे ही सूखी-रूखी निकल जाएगी।
शादी के तीन हफ्ते बाद मुकेश को काम के सिलसिले में दो महीने के लिए दिल्ली जाना पड़ा। पहले कुछ दिनों तक तो फोन आता था, लेकिन एक हफ्ते बाद वह भी बंद हो गया।
एक दिन सुबह मैं बाथरूम में नहा रही थी। अचानक लगा जैसे दरवाजे के छेद से कोई मुझे देख रहा हो। मैं थोड़ी घबरा गई, लेकिन नहाना जारी रखा। तभी अजीब सी आवाजें आने लगीं, जैसे कोई धीरे-धीरे किसी लचकती चीज को मसल रहा हो। मेरी धड़कन तेज हो गई। मैंने जल्दी से कपड़े पहने और जैसे ही दरवाजा खोलने निकली, लगा जैसे कोई कमरे के बाहर भागा हो।
कमरे से बाहर आई तो कोई नहीं था। फिर मैंने देखा कि ससुर जी के कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ है और अंदर से अजीब-अजीब आवाजें आ रही थीं। चुपके से झांका तो मैं हैरान रह गई। ससुर जी बिस्तर पर पूरी तरह बिना कपड़ों के लेटे थे, अपने केले को जोर-जोर से सहला रहे थे और आंखें बंद करके बार-बार सिर्फ मेरा नाम ले रहे थे, “रिया… रिया… आह… आह्ह… जानू… आना…”मैं फटाफट अपने कमरे में भागी और दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया। मन ही मन समझ गई कि अब बहुत सावधानी बरतनी होगी, वरना यह ललित बूढ़ा मेरी सारी जवानी का रस लूट लेगा और मुकेश के लिए कुछ नहीं बचेगा।
उसी रात मैंने मुकेश को कॉल किया। अचानक उसने फोन उठाया और गुस्से से चिल्लाया, “क्यों बार-बार तंग कर रही हो?” तभी फोन में से एक लड़की की आवाज आई, “अरे क्या हुआ जानू?” मुकेश फुसफुसाया, “चुप रहो।”मैं समझ गई कि यह साला अमीर बाप की बिगड़ी औलाद दिल्ली में रंगरेलियां मना रहा है और मुझे यहां अकेला तड़पने के लिए छोड़ गया है। उसी पल मैंने फैसला कर लिया कि अब मैं अपनी जिस्म की प्यास भी बुझाऊंगी और मुकेश से बदला भी लूंगी।
अगले दिन आसपास डांडिया नाइट्स चल रही थीं। मैं भी रात में घाघरा-चोली पहनकर चली गई। जब देर रात वापस आई तो ससुर जी के कमरे की लाइट जल रही थी और फिर वही अजीब आवाजें आने लगीं।
मैंने मन बना लिया कि आज मुझे इस बूढ़े के साथ सुहागरात मनानी है और चरमसुख की प्राप्ति करनी है। मैं अपने कमरे में गई, दरवाजा जानबूझकर लॉक नहीं किया। वही घाघरा-चोली पहने बिस्तर पर लेटकर सोने का नाटक करने लगी। उस रात मैं गजब की खूबसूरत लग रही थी। घाघरे का पल्लू थोड़ा सरक गया था, पेट की चमकती त्वचा दिख रही थी और चोली से मेरी गहरी दरार साफ नजर आ रही थी।
कुछ देर बाद दरवाजा धीरे से खुला। ससुर जी अंदर आए। मुझे सोता हुआ देखकर उन्होंने पहले धीरे-धीरे मेरी टांगों को सहलाना शुरू किया। उनकी उंगलियां मेरी जांघों पर सरक रही थीं, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ। मैंने आंखें बंद रखीं, सांसें थोड़ी तेज कर लीं, जैसे नींद में कराह रही हूं।उन्होंने मेरे पैरों को थोड़ा फैलाया और घुटनों के बीच अपना चेहरा ले आए। उनकी गरम सांस मेरी जांघों पर पड़ रही थी। फिर उन्होंने धीरे से मेरी चोली के नीचे हाथ डाला और मेरे दोनों तरबूजों को दबाना शुरू कर दिया।
मैंने हल्की सी सिसकारी ली, “आह…”यह सुनते ही उनका जोश और बढ़ गया। उन्होंने मेरी चोली पूरी तरह खोल दी और मेरे दोनों तरबूजों को मुंह में ले लिया।
मैं अब नाटक छोड़ चुकी थी। मैंने उनकी कमर पकड़ ली और उन्हें ऊपर खींचा। “ससुर जी… अब और मत तड़पाइए और जल्दी से अपनी प्यारी बहू रिया की प्यास बुझा दीजिए…” मैंने फुसफुसाकर कहा।
उनकी आंखों में आग लग गई। उन्होंने फटाफट अपने कपड़े उतारे। उनका केला पहले से ही फड़फड़ा रहा था, मोटा, लंबा और सख्त। ऐसा लग रहा था जैसे मुझे सलामी पेश कर रहा हो और चीख-चीखकर कह रहा हो कि रिया मुझे अपने मुंह में ले ले। मैंने भी जरा सी देर न करते हुए उनके केले का निमंत्रण स्वीकार किया और उसे मुंह में ले लिया। बड़े चाव से चूसने लगी, जैसे किसी ने छोटे बच्चे को उसका पसंदीदा लॉलीपॉप दे दिया हो।
उन्होंने मेरे बालों को पकड़कर मेरे सिर को आगे-पीछे किया और बोलने लगे, “हां जानेमन, मेरी रानी, लगी रह, चूस ले जितना रस चूसना है। मेरा केला तो कब से तेरा ही इंतजार कर रहा था।
उसके बाद उन्होंने मेरे घाघरे को ऊपर किया और मेरी पैंटी को एक झटके में फाड़ दिया। “रिया… मेरी जान… आज तुझे मैं पूरा संतुष्ट करूंगा…” कहते हुए उन्होंने एक ही झटके में अपना केला पूरा मेरे अंदर डाल दिया।“आआह्ह… ससुर जी… कितना मोटा है…” मैं चीखी, लेकिन दर्द में भी मजा आ रहा था।
फिर शुरू हुई जोरदार धक्कों की बौछार। कमरे में सिर्फ हमारी सिसकारियां और थप्पड़ों की आवाजें गूंज रही थीं। “आह्ह… ससुर जी… आह्ह… और जोर से… ससुर जी और जोर से…” मैं चिल्लाई। मैंने उनकी पीठ पर नाखून गड़ाए, उनकी कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया। वे मुझे बार-बार चूम रहे थे, गले में, तरबूजों पर, होंठों पर।करीब आधे घंटे बाद मैंने महसूस किया कि अब चरम पर हूं। “ससुर जी… बस… अब… आह्ह… मैं जा रही हूं…” मैं चिल्लाई।
उन्होंने और तेज किया और फिर दोनों साथ ही झड़ गए। उनका गरम रस मेरे अंदर भर गया। हम दोनों हांफते हुए एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।
उस रात के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। मुकेश जब दिल्ली से लौटा तो उसे पता चला कि अब उसकी बीवी किसी और की हो चुकी है। मैंने उसे सब कुछ बता दिया, बिना किसी शर्म के। वह गुस्से से लाल हो गया, लेकिन मेरे पास अब ससुर जी का पूरा सपोर्ट था।अब घर में असली मालिक मैं और ललित ससुर जी हैं। मुकेश को हम दोनों मिलकर सबक सिखाते रहते हैं। और हां… मेरी प्यास अब कभी नहीं बुझने वाली, क्योंकि ससुर जी हर रात उसे नए-नए अंदाज में बुझाते हैं। मेरा दिल करता है कि मैं उनके साथ और नए-नए तरीकों से बिस्तर पर मजा लूं।
बस, यही है मेरी कहानी, जिसमें जवानी की प्यास ने मुझे एक नई जिंदगी दी।
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